किसी जन्म में भगवान बुद्ध एक व्यापारी के घर पैदा हुए | वह व्यापारी नगर में फेरी लगाकर अपनी चीजे बेचता था | उसी नगर में सेरिव नाम का व्यापारी भी था | जब भगवान बुद्ध बड़े हुए तब उनके व्यापारी पिता ने सृवे के साथ उन्हें व्यापार के लिए भेजा |
सेरिव बहुत ही चतुर और कपटी व्यापारी था | बुद्ध जी अत्यंत दयालु और सरल ह्रदय थे | वे दोनों एक नगर में पहुचे | उस नगर में एक सेठ था | उसके परिवार में केवल उसकी बीवी इर बेटी थी | उनके पास धन-दोलत न थी | घर में जो कुछ सामान था उसे भी धीरे धीरे बेचकर अपना गुजारा कर रही थी |
सेरिव और बुद्ध उस नगर में फेरी लगाने लगे | उस सेठ परिवार के घर के समाने से पहले सेरिव गुजरा | वह आवाज दे रहा था मनके मोती की माला ले लो |
सेठ की बेटी ने माँ से कहा अगर तुम कहो तो इस फेरीवाले से एक मोती माला ले लू|
माँ, तुम्हे यद् है, हमारे पास पीतल की एक पुरानी थाली पड़ी है| उसे ही बेचकर माला ले लू?
माँ ने सोचा चलो बेटी की इतनी सी इच्छा तो पूरी कर ही सकती हु | इसलिए उसने उसकी बात मान ली |

सेठ की बेटी खुशी खुशी बाहर आई और फेरीवाले को बुलाकर बोली यह थाली ले लो और मुझे एक माला दे दो|
सेरिव ने थाली देखी | थाली मेली जरुर थी पर थी सोने की | सेरिव बोला यह तो दो कोडी की थाली है | इसमें माला क्या, एक गुरिया भी नहीं मिल सकती | यह तो पीतल की है| और वह उस थाली की उपेशा से फेंककर चला गया | उसने सोचा, इस तरह थाली की निंदा करने से उः उसे मुफ्त में ही ले सकेगा |
सेठ की बेटी निराश हो गई | थोड़ी देर बाद दूसरा फेरीवाला आया | उसने इसे भी थाली दिखाकर एक माला मांगी | यह फेरीवाला भगवान बुद्ध थे | उन्होंने देखकर कहा यह तो सोने की है और इसका मूल्य भुत है | मेरे पास तो पांच हजार मुद्रए है |
ठीक है वही दे दो| सेठ की बेटी ने खुश होकर कहा |
बुद्ध जी ने पांच हजार मुद्रए और एक माला देकर वह थाली खरीद ली और वहा से चले गए |
कुछ देर बाद सेरिव फिर आया | सेठ की बेटी से बोला लोओं, उस बेकार थाली के बदले ही में एक माला दे दू |
तुम झूठ बोलते हो } वह थाली सोने की थी | एक फेरीवाला आया था और वह पांच हजार मुद्राओ में खरीदकर ले गया | अच्छा हुआ, तुम्हारी बातो में आकर मेने थाली नहीं दी |
सेरिव बहुत दुखी हुआ | जब वह बुद्ध जी से मिला तब वह उसको देखते ही साडी बात समझ गए | उन्होंने कहा -
तुम तो पुराने हो | लेकिन इतनी सी बात भूल गए की लोभ करले और धोखा देने से व्यापार में सगा हनी होती है | ईमानदारी से व्यापार करनेवाले को ही सोने की थाली मिलती है|


सीख : कभी भी और किसी के साथ भी धोखा मत करो, नुकसान आप का ही होगा |