एक जंगल में तोतो का समूह था | वे तोते हर रोज सुबह हजारो मील कि यात्रा पर जाते | और शाम को अपने घोसलों में लोट आते |तोतो के समूह में सभी के अपने अपने परिवार थे | तोते कि अपनी तेज गति कि उडान के लिए सदा से प्रसिद रहे है | इसलिय बुडापे में सबसे पहले उनकी आंखे कमजोर हो जाती है |तोतो के एक परिवार में माता पिता बूढे हो चले थे | उनका बेटा उनके लिए फल आदि ले आता था | बूढे माता पिता घोसले में बैठे बैठे ही खा लेते और सूख से रहते | वह तोता अपना माता पिता कि सेवा में कोई कमी नहीं रखता था | किंतु स्भाव का मनमोजी था | माता पिता का कहना न मानना और मनचाहे सेर सपाटे करना उसकी आदत बन गई थी |एक दिन उस तोते ने समुंद्र के बिच में एक सुंदर द्वीप देखा और वहा पहुचना चाहा | उसके साथियों ने समझाया सुमंदर बहुत विशाल है | उस द्वीप से समुंदर का किनारा पकड़ना सरल काम नहीं है | तुम वहा मत जाओ |लेकिन उस तोते ने किसीकी बात न सुनी | वह द्वीप कि और उड़ चला | द्वीप पर पहुचकर उसने आम के पेड़ो को देखा | उनमे बड़े बड़े रसीले और मीठे आम लगे हुए थे | ऐसे आम तो उसने देखे ही नहीं थे | उसने ज़ल्दी ज़ल्दी कुछ आम खाए और एक आम लेकर वापस चल दिया |अपने घोसले में आकर उसने वह आम बूढे माता पिता को खिलाया | उसके माता पिता अंधे अवश्य थे, किंतु उन्होंने आम खाते ही कहा क्या हम समुंदर पार हजारो मील दूर स्थित उस द्वीप पर गए थे?हा वहा बड़े असिले फल है |लेकिन वह स्थल हमारी सीमा से बहार है | लालच में पड़कर सीमा तोड़ने से हानि उठानी पडती है|किंतु वह तोता भला माननेवाला था | वह रोज ही वहा जाने लगा | उसके मन में हर दिन उन फलो के लिए लालच बढता गया |एक दिन उसने आवश्कता से अधिक फल खा लिये | उस दिन उसने अपने माता पिता के लिए भी रोज से जयादा बड़ा फल तोडा |यात्रा लम्बी थी और बोझ अधिल था | जयादा फल खाने के कारण वह ज़ल्दी ही थकने लगा | बड़े फल का बोझ भी उड़ने में बाघा उत्पन कर रहा था | वह जितना जोर लगाता उतना ही थक रहा था | समुंद्र पार से उसके साथियों ने उसे इस तरह उड़ते देखा तो परेशान होने लगे | पर करते भी क्या ? आखिर वह तोता चक्कर खाकर समुंद्र में गिरा और डूब गया |अब अन्य तोतो ने उसके माँ-बाप को यह खबर दी तब वे बोले हम जानते थे कि एक दिन लालच में पड़कर वह अपनी जान खो देगा | लालची आदमी का यही हाल होता है |